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Tuesday, July 26, 2022
शिवरात्रि
शिव का पार्थिव इसी दिन दिखता है शिव शक्ति एक साथ । हम पार्थिवों को शिव तत्व के अनुभव का यही दिन है ।क्यों कि हम इन्द्रिय जनित को ही समझ पाते हैं ।
Saturday, August 5, 2017
हठ योग सूत्र से मन का कण्ट्रोल
इन्द्रियाणां मनो नाथो मनोनाथस्तु मारुतः ।
मारुतस्य लयो नाथः स लयो नादमाश्रितः ।। --हठ योग प्रदीपिका
शिव जी कहते हैं- इन्द्रियों का स्वामी मन होता है । मन का स्वामी श्वास होता है।
श्वास का स्वामी लय है। यह लय नाद पर आश्रित है।
गूढ़ सूत्र बहुत कुछ बहुत थोड़े में कहता है।
विपरीत दिशा से पढ़ें तो नाद की सिद्धि आपको जीवन की , मन की , शरीर की , प्रकृति से तादात्म्य की लय देता है। नाद की साधना से आप लय rhythm को पा सकते हैं । लय श्वास पर अधिकार की कु़ञ्जी , चाबी है। इसी श्वास से मन संचालित होता है।
यदि श्वास की लयबद्धता को पा लिया तो , मन का साधन मिल जाता है। प्रत्येक शरीर का एक नैचुरल rhythmic pattern होता है। सूत्र की मानें तो बहुत कुछ करने की आवश्यकता नहीं है। अपने श्वास के इस सहज पैटर्न को ध्यान में लाना है। श्वास की कुछ विशेषताओं पर गौर करना है। चन्द्र और सूर्य स्वर का पैटर्न, श्वास की गति, श्वास की गहराई और इसका बदलाव भर ध्यान में लाना है।
मारुतस्य लयो नाथः स लयो नादमाश्रितः ।। --हठ योग प्रदीपिका
शिव जी कहते हैं- इन्द्रियों का स्वामी मन होता है । मन का स्वामी श्वास होता है।
श्वास का स्वामी लय है। यह लय नाद पर आश्रित है।
गूढ़ सूत्र बहुत कुछ बहुत थोड़े में कहता है।
विपरीत दिशा से पढ़ें तो नाद की सिद्धि आपको जीवन की , मन की , शरीर की , प्रकृति से तादात्म्य की लय देता है। नाद की साधना से आप लय rhythm को पा सकते हैं । लय श्वास पर अधिकार की कु़ञ्जी , चाबी है। इसी श्वास से मन संचालित होता है।
यदि श्वास की लयबद्धता को पा लिया तो , मन का साधन मिल जाता है। प्रत्येक शरीर का एक नैचुरल rhythmic pattern होता है। सूत्र की मानें तो बहुत कुछ करने की आवश्यकता नहीं है। अपने श्वास के इस सहज पैटर्न को ध्यान में लाना है। श्वास की कुछ विशेषताओं पर गौर करना है। चन्द्र और सूर्य स्वर का पैटर्न, श्वास की गति, श्वास की गहराई और इसका बदलाव भर ध्यान में लाना है।
Wednesday, July 26, 2017
योग ईश्वर के साथ तादात्म्य की विधी है
योग ईश्वर के साथ तादात्म्य की विधी है
योग का अर्थ है जुड़ना , जोड़ , इसे अलग-अलग ऋषियों ने अलग अपने तरीके से समझा , बताया .
ये परिकल्पना वैदिक काल से चली आ रही है.
वेद व्यास जी ने महाभारत में कृष्ण मुख से योग समझाया.
पातञ्जली जी ने अपना योग बताया.
शिव संहिता में शिव अपने मुख से पार्वती जी को समझाते है.
बुद्ध के वज्रयान का अलग योग है.
योग का अर्थ है जुड़ना , जोड़ , इसे अलग-अलग ऋषियों ने अलग अपने तरीके से समझा , बताया .
ये परिकल्पना वैदिक काल से चली आ रही है.
वेद व्यास जी ने महाभारत में कृष्ण मुख से योग समझाया.
पातञ्जली जी ने अपना योग बताया.
शिव संहिता में शिव अपने मुख से पार्वती जी को समझाते है.
बुद्ध के वज्रयान का अलग योग है.
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